वेद-एक परिचय

वेद शब्द सुनते ही  आपके मस्तिष्क में क्या विचार आता है?

वेद शब्द सुनते ही  आपके मस्तिष्क में क्या विचार आता है? शायद सबसे पहले विचार आता होगा।

कि वेद  हिन्दू धर्मं के सबसे प्राचीन ग्रन्थ हैं । या फिर यह कि संस्कृत में लिखे गए प्राचीन ग्रन्थ । या फिर कुछ और ।

स्वाभाविक है कि इस संसार में जिस भी चीज से हमारा साक्षात्कार यानि कि सामना नहीं हुआ।  उसके बारे में कुछ भी बिलकुल सटीक किस प्रकार कहा जा सकता है।

हाँ मैं आपको इतना विश्वास जरूर दिला सकता हूँ । कि  हम सभी वेदों के बारे में सोच सकते हैं वेद  उस चिंतन से परे कहीं और अधिक हैं ।

वेदों के बारे में जितना जानोगे कम ही रहेगा । प्रायः आप सब सुनते होंगे कि संसार में ऐसा कुछ नहीं जो वेदों में न प्राप्त हो ।

  किन्तु  हमें अपनी प्राचीन पुस्तकों से मिलेगा क्या हम सबकी इस सोच ने हमें वेदों को केवल धर्मग्रन्थ मानने पर मजबूर किया है । 

तो आइये जानते हैं वेदों का कुछ सामान्य परिचय ।-

चतुर्वेद से क्या तात्पर्य है ?

चतुर्वेद अर्थात चार वेद यानी कि ऋग्वेद यजुर्वेद सामवेद और अथर्ववेद
मुख्य रूप से वेद  ही हमारे प्राचीन ज्ञान के स्रोत माने जाते हैंज्ञानराशि के रूप में वेद हमारी अमूल्य धरोहर हैं
इन वेदों से सम्बद्ध कुछ शाखाएं हैंकुछ उपनिषद, कुछ आरण्यक हैऔर इन वेदों के दृष्टा ऋषि इत्यादि की सामान्य जानकारी यह दी जा रही है –

 

मन्त्र सं.
प्रतिपाद्य-विषय  
ऋत्विक
ऋषि
शिष्य
शाखायें
10580
ज्ञान
होता
अग्नि
पैल
21
1975
कर्म
अध्वर्यु
वायु
वैशम्पायन
101
1875
उपासना
उद्गाता
आदित्य
जैमिनि
1000
अर्थवेद
5987
विज्ञान
ब्रह्मा
अंगिरा
सुमन्तु
9

 

 

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