नीतिश्लोक -विदुरनीति-अभियुक्तं  बलवता दुर्बलं हीनसाधनम्

अभियुक्तं  बलवता दुर्बलं हीनसाधनम् 

हृतस्वं कामिनं चोरमाविशन्ति प्रजागराः


प्रस्तावना 

धृतराष्ट्र व्याकुल थे उन्होंने दूत भेजकर विदुर से मिलने की इच्छा जाहिर की। दूत का सन्देश पाकर विदुर धृतराष्ट्र से मिलने महल पहुंचे। धृतराष्ट्र संजय को लेकर बहुत परेशान थे की कल सभा में वो क्या बताने वाला है। अभी तक पाण्डवों से संजय की क्या बात हुयी नहीं पता चला है । अतः मैं अत्यंत व्याकुल हूँ। मेरे लिए जो कल्याणकारी हो बताइए तात। विदुर ने धृतराष्ट्र से कहा –


अभियुक्तं  बलवता दुर्बलं हीनसाधनम्

हृतस्वं कामिनं चोरमाविशन्ति प्रजागराः


सामान्य अर्थ –

यह श्लोक एक नीति श्लोक है। जिसमें बताया गया है, कि यदि किसी व्यक्ति का बलवान व्यक्ति से विरोध हो जाता है।अर्थात वह व्यक्ति उस व्यक्ति से बलवान है। तो उस दुर्बल मनुष्य को। और जिसका सब कुछ हर लिया गया है।अर्थात् जिसका सब कुछ हरण कर लिया गया है उसको। और कामी व्यक्ति को।तथा चोर को रात्रि में जागने का रोग लग जाता है।


इस श्लोक में कहने का तात्पर्य यह है कि जो व्यक्ति दुर्बल है ।  जिसके पास कुछ भी नहीं। जिसका सब कुछ चोरी हो गया है।और जो कामी व्यक्ति है या कामुक व्यक्ति है।अर्थात् जिसका अपनी इन्द्रियों पर वश नहीं है । और चोर। यह सभी ऐसे व्यक्ति हैंजिनका यदि किसी बलवान व्यक्ति के साथ विरोध हो जाए। तो उनको रातों में नींद नहीं आती क्योंकि उन्हें भय सताता है ।


चिंता क्यों होती है ?

पहला जो दुर्बल मनुष्य है। उसका यदि बलवान से विरोध हो गया। तो वह हमेशा इस चिंता में रहता है,कि वह बलवान व्यक्ति मुझे प्रताड़ित करेगा। कहीं मुझे मारेगा। कहीं मुझे परेशान ना करें। यह चिंता उसको रात में सोने नहीं देती है।

दूसरा जिसका सब कुछ हरण कर लिया गया है। यानी उसका सब कुछ हरण हो गया उसके पास कुछ भी बचा नहीं है।तो उसको चिंता क्या रहती है बलवान से। जो कुछ बचा है वह भी समाप्त ना हो जाए या हमारा जो जीवन है वह संकट में ना आ जाए।

कामी व्यक्ति का यदि बलवान से विरोध हो जाता है तो वह भी चिंतित रहता है कि हमें ने जो भी गलतियां की हैं।वह मेरी गलतियां पकडी ना जाए। या मैंने भी ऐसी हरकतें की हैं पकडी ना जाए।इस भय के कारण गलत कार्य करने वाले को रात में ऐसी चिंता सताती रहती है और सोने नहीं देती।

चोर को रात्रि काल में नींद नहीं आती। क्योंकि उसने चोरी करके अपराध किया है। चोर को हमेशा भय सताता हैवह पकड़ा न जाए। इसलिए सोच सोच कर उसे रातों के नींद नहीं आती। कहा भी गया है

चोर की दाढ़ी में तिनका ।

इस श्लोक से समाज को क्या सीख मिलती है ?

इस श्लोक यह सन्देश दिया गया है कि हमें अपने सामर्थ्यानुकूल कार्य करने चाहिए । तथा गलत कार्यो से दूर रहना चाहिए।और हमें आत्मविश्वास और अपने आप पर भरोसा करते हुए अपने को मजबूत बनाना चाहिए। जिसका सब कुछ हरण हो गया है तो भी आपको धैर्य रखना चाहिए ।आपको परेशान नहीं होना चाहिए।नहीं तो दूसरे आपका फायदा उठाएंगे।

कामी व्यक्ति को काम ही व्यक्ति को अपनी इंद्रियों को वश में करना चाहिए अपनी इन्द्रियां यदि वश में होंगी। तो कोई भी व्यक्ति आप पर बिल्कुल प्रश्न चिह्न नहीं लगा सकता। वह कितना भी बलवान क्यों ना हो।

चोरी करना है गलत काम है और जो कि नहीं करना चाहिए यदि आप ऐसा कोई कार्य करते हैं तो आपको वह नुकसान देगा। और आपकी चिंता का विषय बनेगा ।जिससे आपकी रातों की नींद आपकी उड़ जाएगी। इसलिए हमें गलत कार्य नहीं करने चाहिए। अपने को मजबूत बनाकर रखना चाहिए। और धैर्य रखना चाहिए।


समाप्त